रविवार, 11 अक्तूबर 2009

हमेशा के लिए !

निकल जाते हैं सपने
किसी अनन्त यात्रा पर
बार-बार की यातना से तंग आकर

गीली आँखें
बार-बार पोंछी जाएँ
सख्त हथेलियों से
तो चेहरे पर ख़राशें पड़ जाती हैं
हमेशा के लिए !

1 टिप्पणी:

  1. हमेशा के लिए !

    निकल जाते हैं सपने
    किसी अनन्त यात्रा पर
    बार-बार की यातना से तंग आकर
    Harek kshanika sundar aur arthpoorn hai!Pahli baar aayi hun aapke blogpe! Badi khushee huee!

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